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भोगोलिक स्थिति के कारण सिलीगुडी़ शहर का नाम भारत के मानचित्र पर अपना एक अलग ही महत्त्व है. पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार, हमारा यह शहर हिमालय की गोद में बसा है. पहाडो़ की रानी दार्जिलिंग के हरे-भरे चाय बगानों और सुन्दर ऑर्किड फूलों की घाटी गंगटोक को सारी दुनिया से जोड़नेवाला हमारा प्यारा सिलीगुडी़. इसकी इसी विशेषता के कारण इसका चौतरफा विकास हुआ है. विकास का क्रम लगभग हर क्षेत्र में दिखाई देता है. पूर्वोत्तर तथा आसपास के प्रदेशों के लिए सिलीगुडी़ महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है. पडो़सी देश नेपाल-भूटान के लोग भी इससे विभिन्न रूप में लाभान्वित होते हैं. आगे पढ़े सगाई : सगाई जिसे कहीं ठाका या रोका, कहीं आशिर्वाद या नीरबन्धन तो कहीं मंगनी और कहीं छेका तथा एन्गेजमेन्ट कहा जाता है. यह एक ऐसी रश्म है, जो दो अनजाने परिवारों को एक सूत्र में बांध देती हैं. आगे पढ़े सिन्दुर : सिन्दुर को स्त्रीयों का सुहाग चिन्ह माना जाता है. और विवाह के अवसर पर पति अपनी पत्नि की मांग में सिंन्दुर भर कर जीवन भर उसका साथ निभाने का वचन देता है. आगे पढ़े सात वचनों से बंधी है डोर : शास्त्रानुसार ''यावत्कन्या ना वामांगी तावत्कन्या कुमारिका" अर्थात् जब तक कन्या वर के वाम भाग यानी बाएं भाग की अधिकारिणी नहीं होती.तब तक वह कुमारी ही है. अग्नि की परीक्रमा तथा सप्तपदी के पश्चात वर जब कन्या को अपनी बायीं ओर आसन ग्रहण करने को कहता है, तो कन्या वर से सात वचन लेती है, जो इस प्रकार हैं आगे पढ़े जरूरी है विवाह का पंजीकरण : अगर विवाह होने जा रहा है तो आज के दौर में यह बेहद जरूरी है कि वैवाहिक सम्बन्ध को वैधानिक रूप दे सकें. इसके लिए पहले से सचेत रहना सुरक्षित और समझदारी भरा कदम होगा. आपको जानना चाहिए कि वैवाहिक सम्बन्धों को वैधानिक दर्जा दिलाने के लिए क्या-क्या जरूरी है.आगे पढ़े
पति अपने विवाह के प्रमाणपत्र को बड़ी ध्यान से देख रहा था, पत्नी चिन्तामग्न हो गई. अपने राजस्थानी समाज में गीतों का विशेष स्थान है. विवाह, त्यौंहार, मेले, जन्म या कोई भी खुशी या शुभ कार्य के मौके पर औरतें गीत गाती है. गीत सरस और मीठा इतना होता है कि सभी सुनकर मुग्ध हो जाते और गीत का भाव इतना रंग भरता है कि सभी आनन्द से झुमने लगते हैं.आगे पढ़े |
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