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मान्यवर,
भौगोलिक स्थिति के कारण सिलीगुडी़ शहर का नाम भारत के मानचित्र पर अपना एक अलग ही महत्त्व है. पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार, हमारा यह शहर हिमालय की गोद में बसा है. पहाडो़ की रानी दार्जिलिंग के हरे-भरे चाय बगानों और सुन्दर ऑर्किड फूलों की घाटी गंगटोक को सारी दुनिया से जोड़नेवाला हमारा प्यारा सिलीगुडी़. इसकी इसी विशेषता के कारण इसका चौतरफा विकास हुआ है. विकास का क्रम लगभग हर क्षेत्र में दिखाई देता है. पूर्वोत्तर तथा आसपास के प्रदेशों के लिए सिलीगुडी़ महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है. पडो़सी देश नेपाल-भूटान के लोग भी इससे विभिन्न
रूप में लाभान्वित होते हैं.
सामाजिक प्राणी होने के नाते मनुष्य समाज में रहते हुऐं, विभिन्न रीति-रिवाजो को निभाते और उसका पालन करते रहना उसका नैतिक दायित्व है. एक महत्त्वपूर्ण रस्म, एक खास रीति जो समाज के हर वर्ग को एक-दूसरे से जोडे़ रखती है, एक बन्धन जो आने वाले कल की नींव रखता है, वह बन्धन है "पाणिगृहण संस्कार" अथवा विवाह.
हमारे जीवन में विवाह का बडा़ महत्त्व है और इसमें हमारे जीवन का संचित धन ही व्यय नहीं होता बल्कि हमारा मान-सम्मान भी जुडा़ होता है. इसीलिए विवाह से पहले जरूरी होती है, सही और सटीक जानकारी. जिससे वैवाहिक कार्यक्रम सुचारू रूप से सम्पन्न हो सकें, हमारे धन का अपव्यय न हो तथा अमूल्य समय भी बचे.
सिलीगुडी़ वैवाहिक अनुष्ठानों की दृष्टि से भी एक विशिष्ट स्थान ग्रहण करता जा रहा है. जिसका मुख्य कारण यहाँ विवाह सम्बन्धित जरूरी वस्तुओं की सुविधाजनक उपलब्धता है. इन सभी सुविधाओं के बावजूद बाहर के लोग तथा स्थानीय लोग जानकारी के अभाव में इनसे वंचित रह जाते हैं. इन सब के उपरान्त सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वैवाहिक कार्यक्रम विधि की जानकारी का अभाव भी रहता है.
इन सभी बातों को ध्यान में रखकर, हमने वैवाहिक कार्यक्रमों की रूपरेखा को रूप देने का प्रयास किया है. विवाह सम्बन्धित सभी जानकारियाँ इस साईट "सगाई से विदाई तक.कॉम" (वैवाहिक कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा) में दी जा रही है. जिनमें सगाई से विदाई तक के प्रत्येक रीति-रिवाज, आवश्यक वस्तुओं के साथ उनकी प्राप्ति के स्थान, आवश्यक व्यक्ति, स्थान तथा दूरभाष का वर्णन देने की कोशिश की है. हम अपने प्रयास में कितने सफल हुए हैं ? और कहाँ-कहाँ सुधार की आवश्यकता है ? तथा और अन्य जानकारियाँ जो देनी चाहिए, कृपया कर हमें जरूर
अवगत करावें. आप जानते ही हैं कि इस कार्य को सम्पूर्ण करने में आपके आशीर्वाद तथा सहयोग की आवश्यकता है. जिससे अधिक से अधिक जानकारी इकट्ठा हो सकें. इस संदर्भ में आपके विचारों का सादर स्वागत..
जो कुछ जाना, जो जानकारियाँ मिली आजतक.
उसे हमने एक रूप दिया, "सगाई से विदाई तक".
धन्यवाद !
संजय कुमार वर्मा
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