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सगाई (नीरबन्धन) / नेग

सगाई जिसे कहीं ठाका या रोका, कहीं आशिर्वाद या नीरबन्धन तो कहीं मंगनी और कहीं छेका तथा एन्गेजमेन्ट कहा जाता है. यह एक ऐसी रश्म है, जो दो  अनजाने परिवारों को एक सूत्र में बांध देती हैं.
सगाई के दिन घर परिवार तथा कुटुम्ब-कबिले के लोगो को बुलाना चाहिए. सगाई मे लड़का लड़की को बाऐं हाथ की अनामिका अंगूली में अंगूठी पहनाता है, तत्पश्चात वे दोनों सभी बडो़ को चरण-स्पर्श करतें हैं. लड़का-लड़की की गोद पंच मेवा से भरी जाती है. "घोडी़ बनडा़" का गीत गाया जाता है. छात, आरता एंव वार फेरी भी की जाती है. मिलनी में प्रथम पित्तरों की मिलनी ली/दी जाती है.

सगाई के स्थान पर व्यवस्थाऐं :

यातायात की व्यवस्था
बैठाने की व्यवस्था
शर्बत आदि की व्यवस्था
बर्तन आदि की व्यवस्था
नाश्ते की व्यवस्था
पान-सुपारी-सौंफ की व्यवस्था
मिलनी
ड्राईवर आया हो तो उसे भेंट / नाश्ता
फोटोग्राफर / विडियो की व्यवस्था
फूल की सजावट,लाईट इत्यादी

सामान :

माला
तिलक का सामान
नारियल / रूपया
कन्यापक्ष वालों की व्यवस्थाऐं :
लड्डू का थाल
फलों का थाल
मेवे का थाल
वर के कपडे़ व अन्य सामान




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